दस मुखी रुद्राक्ष
दस मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इसमें दस प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होती हैं। यह रुद्राक्ष सर्वदोष निवारक माना गया है और विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों, ग्रह दोषों एवं जीवन की अदृश्य बाधाओं से रक्षा करता है। इसे एक सुरक्षा कवच के रूप में जाना जाता है।
प्रमुख लाभ
- नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र और बुरी दृष्टि से रक्षा
- सभी ग्रह दोषों के प्रभाव को शांत करने में सहायक
- भय, तनाव और मानसिक अशांति से मुक्ति
- आत्मविश्वास, स्थिरता और मानसिक बल में वृद्धि
- जीवन में आ रही अनदेखी रुकावटों का नाश
- आध्यात्मिक सुरक्षा एवं सकारात्मक वातावरण
धारण करने की विधि
- दस मुखी रुद्राक्ष को चांदी या पंचधातु में धारण करना श्रेष्ठ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या दाएँ हाथ की कलाई में पहन सकते हैं
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- गुरुवार – सबसे उत्तम
- पूर्णिमा या एकादशी विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- दस मुखी रुद्राक्ष का किसी एक ग्रह से विशेष संबंध नहीं होता
- यह सर्वग्रह दोष शमन में सहायक माना जाता है
- कुंडली में मौजूद नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है
- आध्यात्मिक और मानसिक सुरक्षा कवच प्रदान करता है
कौन धारण कर सकता है?
- जो बार-बार बाधाओं, भय या नकारात्मक प्रभाव महसूस करते हों
- जिनकी कुंडली में कई ग्रह दोष हों
- साधक, गृहस्थ एवं नौकरीपेशा व्यक्ति
- जो आध्यात्मिक सुरक्षा और मानसिक स्थिरता चाहते हों
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: दस मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। नकली या कटे-फटे रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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