ग्यारह मुखी रुद्राक्ष
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव के एकादश रुद्र स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। इसमें ग्यारह प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होती हैं। यह रुद्राक्ष अत्यधिक शक्तिशाली, साहसवर्धक और रक्षक माना जाता है। इसे धारण करने से व्यक्ति के भीतर आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और निर्णय शक्ति का विकास होता है।
प्रमुख लाभ
- आत्मविश्वास, साहस और इच्छाशक्ति में वृद्धि
- बुद्धि, निर्णय क्षमता और विवेक का विकास
- नकारात्मक ऊर्जा, भय और अनिष्ट से रक्षा
- नेतृत्व, वाणी और प्रभावशाली व्यक्तित्व
- लक्ष्य प्राप्ति और कार्यक्षेत्र में सफलता
- आध्यात्मिक उन्नति और आत्मरक्षा कवच
धारण करने की विधि
- ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को चांदी या पंचधातु में धारण करना श्रेष्ठ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या दाएँ हाथ की कलाई में पहन सकते हैं
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ ह्रीं हुं नमः” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- मंगलवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- पूर्णिमा या महा शिवरात्रि विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का संबंध हनुमान जी से भी माना जाता है
- यह कुंडली में मंगल दोष, भय और कमजोर आत्मबल को शांत करता है
- यह विशुद्ध एवं आज्ञा चक्र को सक्रिय करता है
- साहस, सेवा और अनुशासन की भावना बढ़ाता है
कौन धारण कर सकता है?
- नेतृत्व, प्रशासन या प्रबंधन से जुड़े लोग
- पुलिस, सेना, सुरक्षा एवं साहसिक क्षेत्रों से जुड़े व्यक्ति
- जिनकी कुंडली में मंगल दोष या आत्मबल की कमी हो
- साधक, योगी और आध्यात्मिक साधना करने वाले
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: ग्यारह मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। नकली या क्षतिग्रस्त रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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