बारह मुखी रुद्राक्ष
बारह मुखी रुद्राक्ष सूर्य देव का प्रतीक माना जाता है। इसमें बारह प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होती हैं। यह रुद्राक्ष तेज, नेतृत्व, आत्मबल और प्रतिष्ठा प्रदान करने वाला माना जाता है। इसे धारण करने से व्यक्ति में राजसी गुण, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता का विकास होता है।
प्रमुख लाभ
- आत्मविश्वास, नेतृत्व और साहस में वृद्धि
- निर्णय क्षमता, स्मरण शक्ति और मानसिक स्पष्टता
- मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और सामाजिक प्रभाव
- भय, हीनभावना और मानसिक कमजोरी से मुक्ति
- करियर, प्रशासन और व्यवसाय में उन्नति
- सकारात्मक ऊर्जा और तेजस्वी व्यक्तित्व
धारण करने की विधि
- बारह मुखी रुद्राक्ष को सोने या तांबे में धारण करना विशेष शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या दाएँ हाथ की कलाई में पहन सकते हैं
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः सूर्याय नमः” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- रविवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- शुक्ल पक्ष या संक्रांति विशेष फलदायी
- समय: प्रातः सूर्योदय के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- बारह मुखी रुद्राक्ष का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में सूर्य दोष, आत्मबल की कमी और नेतृत्व दुर्बलता को दूर करता है
- यह मणिपूर चक्र को सक्रिय करता है
- राजयोग, आत्मसम्मान और तेज को प्रबल करता है
कौन धारण कर सकता है?
- नेतृत्व, प्रशासन और सरकारी सेवाओं से जुड़े लोग
- व्यवसायी, राजनेता और उच्च पद पर कार्यरत व्यक्ति
- जिनकी कुंडली में सूर्य दोष या आत्मबल की कमी हो
- जो मान-सम्मान और प्रभाव बढ़ाना चाहते हों
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: बारह मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। नकली या क्षतिग्रस्त रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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