चौदह मुखी रुद्राक्ष
चौदह मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव के त्रिनेत्र (तीसरे नेत्र) का प्रतीक माना जाता है। इसमें चौदह प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होती हैं। यह रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है, जो व्यक्ति को दिव्य दृष्टि, स्पष्ट निर्णय क्षमता और आध्यात्मिक जागृति प्रदान करता है। इसे देवमणि भी कहा जाता है।
प्रमुख लाभ
- तीव्र अंतर्ज्ञान और दूरदर्शिता
- निर्णय क्षमता, विवेक और मानसिक स्पष्टता
- नकारात्मक शक्तियों, दुर्घटनाओं और अनिष्ट से रक्षा
- करियर, व्यवसाय और नेतृत्व में सफलता
- आध्यात्मिक जागृति और उच्च चेतना
- भय, भ्रम और मानसिक अस्थिरता से मुक्ति
धारण करने की विधि
- चौदह मुखी रुद्राक्ष को सोने या चांदी में धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट के रूप में हृदय या कंठ के पास पहनें
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ नमः शिवाय” या
“ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- मंगलवार या सोमवार – अत्यंत शुभ
- अमावस्या, महा शिवरात्रि या शिव विशेष तिथि
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- चौदह मुखी रुद्राक्ष का संबंध मंगल एवं शनि ग्रह दोनों से माना जाता है
- यह कुंडली में मंगल दोष, शनि दोष और अकस्मात बाधाओं को शांत करता है
- यह आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) को सक्रिय करता है
- भाग्य, सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है
कौन धारण कर सकता है?
- उच्च पद, प्रशासन और नेतृत्व में कार्यरत व्यक्ति
- जिनकी कुंडली में मंगल या शनि दोष हो
- जो निर्णय लेने में भ्रम या भय महसूस करते हों
- साधक, योगी और आध्यात्मिक साधना करने वाले
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: चौदह मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। यह अत्यंत दुर्लभ होता है, इसलिए केवल विश्वसनीय स्रोत से ही प्राप्त करें।






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