गर्भ गौरी रुद्राक्ष
गर्भ गौरी रुद्राक्ष भगवान शिव और माता पार्वती के माता-पुत्र स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। इसमें एक बड़ा रुद्राक्ष और उससे प्राकृतिक रूप से जुड़ा हुआ एक छोटा रुद्राक्ष होता है, जो माँ और गर्भस्थ शिशु का प्रतीक है। यह रुद्राक्ष मातृत्व, संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है।
प्रमुख लाभ
- संतान प्राप्ति में सहायक
- गर्भ की सुरक्षा एवं स्वस्थ शिशु जन्म में लाभकारी
- पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम और सामंजस्य
- गर्भावस्था के दौरान मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
- मातृत्व सुख एवं पारिवारिक खुशहाली
- नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
धारण करने की विधि
- गर्भ गौरी रुद्राक्ष को चांदी में धारण करना विशेष शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट के रूप में या कमर के पास धारण किया जा सकता है
- धारण से पूर्व:
- रुद्राक्ष को गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ नमः शिवाय” या
“ॐ गौरीशंकराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- सोमवार – सबसे उत्तम
- पूर्णिमा या महा शिवरात्रि – विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- गर्भ गौरी रुद्राक्ष का संबंध चंद्र एवं गुरु ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में संतान दोष, मानसिक तनाव और पारिवारिक असंतुलन को शांत करता है
- यह स्वाधिष्ठान एवं हृदय चक्र को सक्रिय करता है
- मातृत्व, करुणा और पारिवारिक ऊर्जा को मजबूत करता है
कौन धारण कर सकता है?
- संतान सुख की कामना करने वाले दंपत्ति
- गर्भवती महिलाएँ (ज्योतिषीय परामर्श के बाद)
- जिनके विवाह में संतान संबंधी विलंब हो
- पारिवारिक सुख-शांति चाहने वाले व्यक्ति
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
महत्वपूर्ण सूचना:
गर्भवती महिलाएँ इसे धारण करने से पहले विशेषज्ञ ज्योतिषीय या आध्यात्मिक सलाह अवश्य लें। रुद्राक्ष प्राकृतिक और प्रमाणित होना अनिवार्य है।






Reviews
There are no reviews yet.