कालसर्प योग कष्ट कारक एवं ऐश्वर्यदायक है I
सामान्य अवधारणा है की जब राहू और केतु के मध्य में या इनके प्रभाव में सभी ग्रह आ जाते है तो काल सर्प दोष / योग का निर्माण होता है I ऐसा नही है ये काल सर्प दोष / योग हमेशा बुरा ही फल देता है I राहू केतु की दशा में विशेष ध्यान रखने की आश्यकता होती है I
काल सर्प दोष / योग से घबराने की आवश्यकता बिलकुल भी नहीं है I ये जीवन बहुत तरक्की और मान सम्मान भी देता है I कुंडली में राहू की स्थिति के अनुसार इसके प्रभाव होते है I
जिन व्यक्तियों की कुंडली में काल सर्प योग विदमान होता है उन व्यक्तियों को जीवन में संघर्ष अधिक करना पड़ता है, अधिक मेहनत के बाद कम फल की प्राप्ति होना I जीवन सांप सीडी के सामान महसूस होता है की बहुत मेहनत करके प्रयास करके 98 पर आये अब हमे सिर्फ दो नंबर की आवश्यकता होती है लक्ष्य की प्राप्ति के लिए परन्तु एक नंबर आता है और 99 पर बैठा सांप काट लेता है और हमे फिर दोबारा से यात्रा शुरू करनी पड़ती है I
सपने में सांप या नाग दिखाई देते है, पानी से डरना , सपने में खुद को पानी में डूबता हुए देखना और पानी से बहार आने के लिए प्रयास करना , स्वयं को हवा में उड़ते हुए देखना , लगातार मन किसी अनिष्ट की आशंका से भयभीत रहना I ऐसे लोगो को भाग्य का सपोर्ट कम ही मिलता है इनको कर्म करने पर ही फल की प्राप्ति होती है I
बहुत से ऐसे लोग हुए है जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष / योग बना है परन्तु उन्होंने अपने जीवन में उचाईयों को छुआ एक अलग मुकाम हासिल किया I इन लोगो मुख्यत जवाहर लाल नेहरु, धीरुभाई अम्बानी, स्मिता पाटिल, सचिन तेंदुलकर आदि है I इन लोगो इतिहास अगर देखा जाये तो इनके जीवन के शुरुवाती काल में बहुत संघर्ष रहा I इन लोगो को बहुत संघर्षो का सामना करना पड़ा I परन्तु कुंडली में उपस्थित अन्य शुभ योगो के कारण और स्थितिनुसार काल सर्प दोष / योग के नकारात्मक प्रभाव को पूजन अनुष्ठान के द्वारा शांत रखने से ये लोग जीवन की उचाईयों को छूते चले गए I
कालसर्प दोष / पितृ दोष आदि की शांति के लिए पूजन अनुष्ठान के लिए उज्जैन, महाकाल नगरी का विशेष स्थान है I इस धार्मिक स्थान पर काल सर्प दोष , पितृ दोष आदि की शांति करने से इसके सम्पूर्ण नकारात्मक प्रभाव शांत हो जाते है और ग्रहों के शुभ प्रभाव मिलने लगते है I
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- अनंत कालसर्प दोष (राहु प्रथम भाव में)
- कुलिक कालसर्प दोष (राहु द्वितीय भाव में)
- वासुकि कालसर्प दोष (राहु तृतीय भाव में)
- शंखपाल कालसर्प दोष (राहु चतुर्थ भाव में)
- पद्म कालसर्प दोष (राहु पंचम भाव में)
- महापद्म कालसर्प दोष (राहु छठे भाव में)
- तक्षक कालसर्प दोष (राहु सातवें भाव में)
- कर्कोटक कालसर्प दोष (राहु आठवें भाव में)
- शंखचूड़ कालसर्प दोष (राहु नवम भाव में)
- घातक कालसर्प दोष (राहु दशम भाव में)
- विषधर कालसर्प दोष (राहु ग्यारहवें भाव में)
- शेषनाग कालसर्प दोष (राहु बारहवें भाव में)






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