तेरह मुखी रुद्राक्ष
तेरह मुखी रुद्राक्ष भगवान इंद्र एवं कामदेव से संबंधित माना जाता है। इसमें तेरह प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होती हैं। यह रुद्राक्ष आकर्षण, सिद्धि, इच्छापूर्ति और भौतिक सुखों का प्रतीक है। इसे धारण करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में चुंबकीय आकर्षण, आत्मविश्वास और सफलता की ऊर्जा बढ़ती है।
प्रमुख लाभ
- आकर्षण, करिश्मा और व्यक्तित्व में प्रभाव
- प्रेम, वैवाहिक जीवन और संबंधों में मधुरता
- इच्छापूर्ति, लक्ष्य प्राप्ति और सफलता
- व्यवसाय, सेल्स, मार्केटिंग और मीडिया में उन्नति
- आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक सोच
- आध्यात्मिक एवं भौतिक संतुलन
धारण करने की विधि
- तेरह मुखी रुद्राक्ष को सोने या चांदी में धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या दाएँ हाथ की कलाई में पहन सकते हैं
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ नमो भगवते रुद्राय” या
“ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- शुक्रवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- पूर्णिमा या शुक्ल पक्ष विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- तेरह मुखी रुद्राक्ष का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में शुक्र दोष, आकर्षण की कमी और संबंधों की समस्या को दूर करता है
- यह स्वाधिष्ठान एवं हृदय चक्र को सक्रिय करता है
- भोग और योग – दोनों में संतुलन प्रदान करता है
कौन धारण कर सकता है?
- जो आकर्षण, प्रभाव और करिश्मा बढ़ाना चाहते हों
- कलाकार, मॉडल, अभिनेता, सेल्स व मार्केटिंग प्रोफेशनल
- प्रेम, विवाह या संबंधों में मधुरता चाहने वाले
- व्यवसाय में उन्नति और सफलता चाहने वाले
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: तेरह मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। नकली या क्षतिग्रस्त रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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