दो मुखी रुद्राक्ष
दो मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप (अर्धनारीश्वर) का प्रतीक माना जाता है। इसमें दो प्राकृतिक रेखाएँ (मुख) होती हैं। यह रुद्राक्ष विशेष रूप से संबंधों में संतुलन, प्रेम और सामंजस्य स्थापित करने के लिए जाना जाता है।
प्रमुख लाभ
- पति-पत्नी एवं प्रेम संबंधों में मधुरता लाता है
- आपसी मतभेद, मनमुटाव और गलतफहमियाँ दूर करता है
- मानसिक द्वंद्व और निर्णय भ्रम को समाप्त करता है
- संचार में सुधार करता है
- तनाव, अकेलापन और भावनात्मक असंतुलन में लाभकारी
- आत्मिक संतुलन और स्थिरता प्रदान करता है
धारण करने की विधि
- दो मुखी रुद्राक्ष को चांदी में धारण करना विशेष शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या हृदय के पास पहनें
- धारण से पूर्व
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ नमः शिवाय” या
“ॐ नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- सोमवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- पूर्णिमा या शिवरात्रि विशेष फलदायी
- समय: प्रातः काल स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- दो मुखी रुद्राक्ष का संबंध चंद्र ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में चंद्र दोष, मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक कमजोरी को शांत करता है
- यह स्वाधिष्ठान चक्र को संतुलित करता है
- विवाह, साझेदारी और पारिवारिक जीवन में शुभ प्रभाव देता है
कौन धारण कर सकता है?
- पत्नी या प्रेम संबंधों में तनाव झेल रहे व्यक्ति
- विवाह में देरी या वैवाहिक कलह से पीड़ित लोग
- साझेदारी में कार्यरत व्यक्ति
- मानसिक अस्थिरता या भावनात्मक असंतुलन से जूझ रहे लोग
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: दो मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और सही मुख वाला होना चाहिए। नकली या कटे-फटे रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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