तीन मुखी रुद्राक्ष
तीन मुखी रुद्राक्ष अग्नि देव का प्रतीक माना जाता है। इसमें तीन प्राकृतिक रेखाएँ (मुख) होती हैं। यह रुद्राक्ष पाप नाशक, ऊर्जा प्रदायक और आत्मबल को जाग्रत करने वाला माना जाता है। विशेष रूप से यह पूर्व जन्म या वर्तमान जीवन के दोषों को समाप्त करने में सहायक माना गया है।
प्रमुख लाभ
- नकारात्मक कर्मों और दोषों से मुक्ति
- आत्मग्लानि, हीनभावना और अपराधबोध को दूर करता है
- आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा में वृद्धि
- अवसाद, डर और मानसिक कमजोरी में लाभकारी
- जीवन में नई शुरुआत और सकारात्मक परिवर्तन
- आंतरिक शक्ति एवं इच्छाशक्ति को जाग्रत करता है
धारण करने की विधि
- तीन मुखी रुद्राक्ष को तांबे या चांदी में धारण करना शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या नाभि के पास पहनना लाभकारी होता है
- धारण करने से पहले
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ क्लीं नमः” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- मंगलवार – विशेष रूप से शुभ
- शिवरात्रि – अत्यंत फलदायी
- समय: प्रातः सूर्योदय के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- तीन मुखी रुद्राक्ष का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में मंगल दोष, ऊर्जा की कमी और क्रोध को संतुलित करता है
- यह मणिपूर चक्र को सक्रिय करता है
- शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है
कौन धारण कर सकता है ?
- आत्मविश्वास की कमी या भय से ग्रस्त व्यक्ति
- जो बार-बार असफलता या रुकावटों का सामना कर रहे हों
- युवा वर्ग, विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले
- जो अपने जीवन में नई दिशा और सकारात्मक परिवर्तन चाहते हों
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: तीन मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित एवं बिना कटे-फटे होना चाहिए। नकली रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं होता।






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