चार मुखी रुद्राक्ष
चार मुखी रुद्राक्ष भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। इसमें चार प्राकृतिक रेखाएँ (मुख) होती हैं। यह रुद्राक्ष बुद्धि, ज्ञान, वाणी और रचनात्मक शक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है। विशेष रूप से यह सीखने, समझने और अभिव्यक्ति की क्षमता को सशक्त करता है।
प्रमुख लाभ
- स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि
- शिक्षा, अध्ययन और ज्ञान अर्जन में सहायक
- वाणी दोष, हकलाहट और संचार समस्याओं में लाभकारी
- रचनात्मकता, लेखन और कला कौशल को प्रबल करता है
- आत्मविश्वास एवं सामाजिक प्रभाव बढ़ाता है
- मानसिक भ्रम और तनाव को शांत करता है
धारण करने की विधि
- चार मुखी रुद्राक्ष को चांदी या तांबे में धारण करना शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या हृदय के पास पहनना लाभकारी होता है
- धारण से पूर्व
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ ह्रीं नमः” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- बुधवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- पूर्णिमा या शिवरात्रि – विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- चार मुखी रुद्राक्ष का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में बुध दोष, वाणी और बौद्धिक कमजोरी को दूर करता है
- यह विशुद्ध चक्र को सक्रिय करता है
- तार्किक क्षमता, संचार कौशल और विवेक को सशक्त करता है
कौन धारण कर सकता है?
- विद्यार्थी, शोधकर्ता और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले
- शिक्षक, वक्ता, लेखक, पत्रकार और कलाकार
- व्यापार, मार्केटिंग और संचार से जुड़े व्यक्ति
- जिनकी वाणी या निर्णय क्षमता कमजोर हो
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: चार मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। कृत्रिम या नकली रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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