छह मुखी रुद्राक्ष
छह मुखी रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय (स्कंद) का प्रतीक माना जाता है। इसमें छह प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होते हैं। यह रुद्राक्ष ज्ञान, अनुशासन, साहस और आकर्षण को बढ़ाने वाला माना जाता है। विशेष रूप से यह युवाओं, विद्यार्थियों और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
प्रमुख लाभ
- एकाग्रता, स्मरण शक्ति और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि
- शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर में सफलता
- साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व गुणों का विकास
- क्रोध, कामवासना और चंचलता पर नियंत्रण
- संचार कौशल और व्यक्तित्व में आकर्षण
- मानसिक तनाव और अस्थिरता में कमी
धारण करने की विधि
- छह मुखी रुद्राक्ष को चांदी या तांबे में धारण करना शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या दाएँ हाथ की कलाई में पहन सकते हैं
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ ह्रीं हौं नमः” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- बुधवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- पूर्णिमा या शिवरात्रि – विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- छह मुखी रुद्राक्ष का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में शुक्र दोष, आकर्षण की कमी और संबंधों की उलझन को संतुलित करता है
- यह स्वाधिष्ठान चक्र को संतुलित करता है
- भौतिक और बौद्धिक दोनों प्रकार की उन्नति में सहायक
कौन धारण कर सकता है?
- विद्यार्थी, युवा वर्ग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले
- कलाकार, मॉडल, मीडिया और क्रिएटिव क्षेत्र से जुड़े लोग
- जो आत्मविश्वास, आकर्षण और अनुशासन बढ़ाना चाहते हों
- विवाह या संबंधों में संतुलन चाहने वाले व्यक्ति
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: छह मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। नकली या क्षतिग्रस्त रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।






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