आठ मुखी रुद्राक्ष
आठ मुखी रुद्राक्ष भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। इसमें आठ प्राकृतिक मुख (रेखाएँ) होती हैं। यह रुद्राक्ष विघ्नहर्ता स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है और जीवन में आने वाली बाधाओं, भ्रम और भय को दूर करने में सहायक माना जाता है। यह रुद्राक्ष विशेष रूप से निर्णय क्षमता और साहस को मजबूत करता है।
प्रमुख लाभ
- जीवन की बाधाएँ, रुकावटें और विघ्न दूर करता है
- एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि
- भय, भ्रम और मानसिक अस्थिरता से मुक्ति
- कार्य, व्यवसाय और करियर में सफलता
- जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और नई शुरुआत
- आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
धारण करने की विधि
- आठ मुखी रुद्राक्ष को चांदी या पंचधातु में धारण करना शुभ माना जाता है
- इसे गले में लॉकेट या दाएँ हाथ की कलाई में पहन सकते हैं
- धारण से पूर्व:
- गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें
- “ॐ गं गणपतये नमः” या
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
कौन-सा दिन धारण करें?
- बुधवार – सर्वश्रेष्ठ दिन
- अमावस्या या गणेश चतुर्थी विशेष फलदायी
- समय: प्रातः स्नान के बाद
ज्योतिषीय जानकारी
- आठ मुखी रुद्राक्ष का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है
- यह कुंडली में राहु दोष, भ्रम और अचानक आने वाली बाधाओं को शांत करता है
- यह मूलाधार चक्र को सक्रिय करता है
- जीवन में स्थिरता, साहस और स्पष्टता लाता है
कौन धारण कर सकता है?
- जो बार-बार रुकावटों और असफलताओं का सामना कर रहे हों
- व्यवसाय, नौकरी या पढ़ाई में अटकाव से परेशान लोग
- निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करने वाले व्यक्ति
- जिनकी कुंडली में राहु दोष हो
- स्त्री एवं पुरुष दोनों धारण कर सकते हैं
ध्यान दें: आठ मुखी रुद्राक्ष प्राकृतिक, प्रमाणित और पूर्ण मुखों वाला होना चाहिए। नकली या क्षतिग्रस्त रुद्राक्ष से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।



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