बगलामुखी अनुष्ठान
माँ बगलामुखी की स्तंभन एवं विजयकारी शक्ति को जाग्रत करने हेतु कराया जाता है। माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या हैं और इनकी साधना का मुख्य उद्देश्य शत्रुओं की नकारात्मक बुद्धि, वाणी और कर्म को निष्क्रिय करना माना गया है। जब व्यक्ति के जीवन में लगातार विरोध, षड्यंत्र, मुकदमेबाज़ी, अपयश, झूठे आरोप, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक बाधाएँ या पारिवारिक कलह बढ़ जाती है, तब यह अनुष्ठान अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
इस अनुष्ठान के माध्यम से साधक के विरुद्ध कार्य कर रही नकारात्मक शक्तियाँ शांत होती हैं, शत्रुओं की चालें विफल होती हैं और उनके द्वारा की जा रही हानि रुक जाती है।
विशेष रूप से कोर्ट-कचहरी, सरकारी मामलों, नौकरी-व्यवसाय में विरोध, वाणी दोष, बार-बार गलत बोलने से बनने वाले विवाद तथा आकस्मिक संकटों की शांति के लिए बगलामुखी अनुष्ठान कराया जाता है। इसके लाभस्वरूप साधक को शत्रुओं पर विजय, निर्णय-शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि, वाणी में प्रभाव व संयम, मानसिक स्थिरता, भय से मुक्ति तथा अदृश्य सुरक्षा कवच की अनुभूति होती है। साथ ही जीवन में चल रही अकारण रुकावटें धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और परिस्थितियाँ अपने आप अनुकूल बनने लगती हैं।






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